होली/Holi के 7 विशेष उपहार !

होली/Holi के 7 विशेष उपहार

1) होली/Holi की रात जप-ध्यान करने से अनंतगुना फल होता है । यह मंत्र साफल्य – दिवस है, घुमक्कड़ों की नाई भटकने का दिन नहीं है | मौन रहना, उपवास या फलाहार करना और अपना-अपना गुरुमंत्र जपना ।

इस दिन जिस निमित्त से भी जप करोंगे वह सिद्ध होगा । ईश्वर को पाने के लिए जप करना । नाम –जप की कमाई बढ़ा देना ताकि दुबारा माँ की कोख में उलटा होकर न टंगना पड़े । पेशाब के रास्ते से बहकर नाली में गिरना न पड़े ।

2) होली के दिनों में भुने हुए चने खाने से वात और कफ का शमन होता है । होली के बाद खजूर का सेवन न करें ।

3) स्वास्थ्य रक्षक पलाश : पलाश के फूलों का रंग होली के बाद पड़नेवाली सूर्य की तीखी किरणों को झेलने की शक्ति देता है । शरीर में छुपी हुई पितजन्य, वायुजन्य तकलीफों को दूर कर रोगप्रतिकारक शक्ति ब‹ढाता है अतः पलाश के फूलों से ही होली खेलें ।

4) बुद्दि की शद्धि हेतु : पलाश व बेल के सूखे पत्ते, गाय का घी व मिश्री समभाग में मिलाकर धूप करने से अथवा गौचंदन धूपबत्ती जलाकर प्राणायाम करने से बुद्धि की शुद्धि व वृद्धि होती है ।

5) रंग छुडाने के लिए : होली खेलने से पहले अपने शरीर पर नारियल अथवा सरसों का तेल अच्छी तरह मल लेना चाहिए, ताकि शरीर पर रासायनिक रंगों का दुष्प्रभाव न पड़ें और साबुन लगाने मात्र से रंग छूट जाए l यदि किसीने आप पर रासायनिक रंग लगा दिया हो तो तुरंत ही बेसन, आटा, दूध, हल्दी व् तेल के मिश्रण से बना उबटन रंगे हुए अंगों पर लगाकर रंग को धो डालना चाहिए l यदि उबटन लगाने से पूर्व उस स्थान को नींबू से रगड़कर साफ़ कर लिया जाय तो रंग छूटने में और अधिक सुगमता होती है l

6) होली के बाद खजूर नहीं खाना चाहिए , ये पचने में भारी होते है , इन दिनों में सर्दियों का जमा हुआ कफ पिघलता है और जठराग्नि कम करता है. इसलिए इन दिनों में हल्का भोजन करें, धाणी और चना खाएं , जिससे जमा हुआ कफ निकल जाये l

7) होली के दिनों में 15-20 दिन सुबह 15-20 नीम के पत्ते और काली मिर्च चबा-चबाकर खाने से चर्म रोग दूर होते हैं l भोजन में नीम का तेल उपयोग करने से भी लाभ होता है l

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