Gupt Navratri/गुप्त नवरात्रि का इस मंत्र से कुछ उपाय!

Gupt Navratri / गुप्त नवरात्रि

में किए गए उपायों से परेशानियां दूर हो सकती हैं।

आषाढ़ मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र का पर्व मनाया जाता है । बहुत कम लोग इस नवरात्र के बारे में जानते हैं, इसलिए इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है।

वर्ष में 4 नवरात्रियाँ होती हैं !

वर्ष में 4 नवरात्रियाँ होती हैं, जिनमे से सामान्यतः दो नवरात्रियो के बारे में आपको पता है, पर शेष दो गुप्त नवरात्रियाँ हैं l

1.माघ मास की शुक्ल पक्ष की प्रथम ९ तिथियाँ !

2.चैत्र मास की रामनवमी के समय आती हैं वो ९ तिथियाँ !

3.आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष के ९ दिन !

4.अश्विन महीने की दशहरे के पहले आनेवाली ९ तिथियाँ !

गुप्त नवरात्रि  में मां दुर्गा की पूजा का पर्व चलेगा । गुप्त नवरात्रि  में किए गए उपायों से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं ।

यहां जानिए गुप्त नवरात्रि  के लिए ऐसे कुछ सरल उपाय…

1.अगर किसी व्यक्ति के विवाह में कोई बाधा आ रही हैं तो उसे माता दुर्गा को पीले फूल की माला चढ़ानी चाहिए ।

2.अगर संतान के संबंध में कोई समस्या आ रही हैं तो माता दुर्गा को पान का पत्ता अर्पित करें । पत्ता टूटा नहीं होना चाहिए ।

3.मुकदमे से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए, शत्रु और कर्ज से छुटकारा पाने के लिए माता दुर्गा के सामने गुग्गल के सुगंध वाला धूप जलाएं ।

विद्यार्थियों के लिए :-

प्रथम नवरात्रि के दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रख कर पूजन करें और नवरात्रि के तीसरे तीन दिन विद्यार्थी सारस्वत्य मंत्र का जप करें।

इससे उन्हें विद्या प्राप्ति में अपार सफलता मिलती है l

बुद्धि व ज्ञान का विकास करना हो तो सूर्यदेवता का भ्रूमध्य में ध्यान करें । जिनको गुरुमंत्र मिला है वे गुरुमंत्र का, गुरुदेव का, सूर्यनारायण का ध्यान करें।

शत्रु को मित्र बनाने के लिए :-

नवरात्रि में शुभ संकल्पों को पोषित करने, रक्षित करने, मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए और शत्रुओं को मित्र बनाने वाले मंत्र की सिद्धि का योग होता है।

नवरात्रि में स्नानादि से निवृत्त हो तिलक लगाके एवं दीपक जलाकर यदि कोई बीज मंत्र ‘हूं’ (Hum) अथवा ‘अं रां अं’ (Am Raam Am) मंत्र की इक्कीस माला जप करे एवं ‘श्री गुरुगीता’ का पाठ करे तो शत्रु भी उसके मित्र बन जायेंगे l

माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग-1 :-

जिन माताओं बहनों को दुःख और कष्ट ज्यादा सताते हैं, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी-स्थापना के दिन) दिया जलायें और कुम-कुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें, पूजा करते समय निम्न मंत्र बोलें :

“अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले “

” ASHOK SHOK SHAMNO BHAV SARVATRA NAH KULE “

भविष्योत्तर पुराण के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन इस तरह पूजा करने से माताओ बहनों के कष्टों का जल्दी निवारण होता है l

माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग-2 :-

अषाढ़ मास शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन में सिर्फ बिना नमक मिर्च का भोजन करें l (जैसे दूध, रोटी या खीर खा सकते हैं, नमक मिर्च का भोजन ही करें l)

” ॐ ह्रीं गौरये नमः “

“Om Hreem Goryaye Namah”

मंत्र का जप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वयं को कुमकुम का तिलक करें l

गाय को चन्दन का तिलक करके गुड़ ओर रोटी खिलाएं l

श्रेष्ठ अर्थ (धन) की प्राप्ति हेतु :-

प्रयोग : नवरात्रि में देवी के एक विशेष मंत्र का जप करने से श्रेष्ठ अर्थ कि प्राप्ति होती है  मंत्र ध्यान से पढ़ें

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल-वासिन्ये स्वाह् “

” OM SHREEM HREEM KLEEM AIM KAMALVAASINYE SWAHA “

अतः इस सरल मंत्र की एक-दो माला नवरात्रि में अवश्य करें और लाभ लें l

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