9 Health Benefits of Anjeer

9 Health Benefits of Anjeer

अंजीर के फायदे और औषधि प्रयोग !

अंजीर (Anjeer/Figs) की लाल, काली, सफेद और पीली – ये चार प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं। इसके कच्चे फलों की सब्जी बनती है। पके अंजीर का मुरब्बा बनता है। अधिक मात्रा में अंजीर खाने से यकृत एवं जठर को नुकसान होता है। बादाम खाने से अंजीर के दोषों का शमन होता है।

गुणधर्मः पके, ताजे अंजीर गुण में शीतल, स्वाद में मधुर, स्वादिष्ट एवं पचने में भारी होते हैं। ये वायु एवं पित्तदोष का शमन एवं रक्त की वृद्धि करते हैं। ये रस एवं विपाक में मधुर एवं शीतवीर्य होते हैं। भारी होने के कारण कफ, मंदाग्नि एवं आमवात के रोगों की वृद्धि करते हैं। ये कृमि, हृदयपीड़ा, रक्तपित्त, दाह एवं रक्तविकारनाशक हैं। ठंडे होने के कारण नकसीर फूटने में, पित्त के रोगों में एवं मस्तक के रोगों में विशेष लाभप्रद होते हैं।

अंजीर में विटामिन ए होता है जिससे वह आँख के कुदरती गीलेपन को बनाये रखता है।

सूखे अंजीर में उपर्युक्त गुणों के अलावा शरीर को स्निग्ध करने, वायु की गति को ठीक करने एवं श्वास रोग का नाश करने के गुण भी विद्यमान होते हैं।

अंजीर के बादाम एवं पिस्ता के साथ खाने से बुद्धि बढ़ती है और अखरोट के साथ खाने से विष-विकार नष्ट होता है।

किसी बालक ने काँच, पत्थर अथवा ऐसी अन्य कोई अखाद्य ठोस वस्तु निगल ली हो तो उसे रोज एक से दो अंजीर खिलायें। इससे वह वस्तु मल के साथ बाहर निकल जायेगी। अंजीर चबाकर खाना चाहिए।

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सभी सूखे मेवों में देह को सबसे ज्यादा पोषण देने वाला मेवा अंजीर है। इसके अलावा यह देह की कांति तथा सौंदर्य बढ़ाने वाला है। पसीना उत्पन्न करता है एवं गर्मी का शमन करता है।

मात्राः 2 से 4 अंजीर खाये जा सकते हैं। भारी होने से इन्हें ज्यादा खाने पर सर्दी, कफ एवं मंदाग्नि हो सकती है।

औषधि-प्रयोग

रक्त की शुद्धि व वृद्धिः 3-4 नग अंजीर को 200 ग्राम दूध में उबालकर रोज पीने से रक्त की वृद्धि एवं शुद्धि, दोनों होती है। इससे कब्जियत भी मिटती है।

रक्तस्रावः कान, नाक, मुँह आदि से रक्तस्राव होता हो तो 5-6 घंटे तक 2 अंजीर भिगोकर रखें और पीसकर उसमें दुर्वा का 20-25 ग्राम रस और 10 ग्राम मिश्री डालकर सुबह-शाम पियें।

ज्यादा रक्तस्राव हो तो खस एवं धनिया के चूर्ण को पानी में पीसकर ललाट पर एवं हाथ-पैर के तलवों पर लेप करें। इससे लाभ होता है।

मंदाग्नि एवं उदररोगः जिनकी पाचनशक्ति मंद हो, दूध न पचता हो उन्हें 2 से 4 अंजीर रात्रि में पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाने चाहिए एवं वही पानी पी लेना चाहिए

कब्जियतः प्रतिदिन 5 से 6 अंजीर के टुकड़े करके 250 मि.ली. पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी को उबालकर आधा कर दें और पी जायें। पीने के बाद अंजीर चबाकर खायें तो थोड़े ही दिनों में कब्जियत दूर होकर पाचनशक्ति बलवान होगी। बच्चों के लिए 1 से 3 अंजीर पर्याप्त हैं।

आधुनिक विज्ञान के मतानुसार अंजीर बालकों की कब्जियत मिटाने के लिए विशेष उपयोगी है। कब्जियत के कारण जब मल आँतों में सड़ने लगता है, तब उसके जहरीले तत्त्व रक्त में मिल जाते हैं और रक्तवाही धमनियों में रुकावट डालते हैं, जिससे शरीर के सभी अंगों में रक्त नहीं पहुँचता। इसके फलस्वरूप शरीर कमजोर हो जाता है तथा दिमाग, नेत्र, हृदय, जठर, बड़ी आँत आदि अंगों में रोग उत्पन्न हो जाते हैं। शरीर दुबला-पतला होकर जवानी में ही वृद्धत्व नज़र आने लगता है। ऐसी स्थिति में अंजीर का उपयोग अत्यंत लाभदायी होता है। यह आँतों की शुद्धि करके रक्त बढ़ाता है एवं रक्त परिभ्रमण को सामान्य बनाता है।

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बवासीरः 2 से 4 अंजीर रात को पानी में भिगोकर सुबह खायें और सुबह भिगोकर शाम को खायें। इस प्रकार प्रतिदिन खाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। अथवा अंजीर, काली द्राक्ष (सूखी), हरड़ एवं मिश्री को समान मात्रा में लें। फिर उन्हें कूटकर सुपारी जितनी बड़ी गोली बना लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 1-1 गोली का सेवन करने से भी लाभ होता है।

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बहुमूत्रताः जिन्हें बार-बार ज्यादा मात्रा में ठंडी व सफेद रंग का पेशाब आता हो, कंठ सूखता हो, शरीर दुर्बल होता जा रहा हो तो रोज प्रातः काल 2 से 4 अंजीर खाने के बाद ऊपर से 10 से 15 ग्राम काले तिल चबाकर खायें। इससे आराम मिलता है।

मूत्राल्पताः 1 या 2 अंजीर में 1 या 2 ग्राम कलमी सोडा मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से मूत्राल्पता में लाभ होता है।

श्वास (गर्मी का दमा): 6 ग्राम अंजीर एवं 3 ग्राम गोरख इमली का चूर्ण सुबह-शाम खाने से लाभ होता है। श्वास के साथ खाँसी भी हो तो इसमें 2 ग्राम जीरे का चूर्ण मिलाकर लेने से ज्यादा लाभ होगा।

कृमिः अंजीर रात को भिगो दें, सुबह खिलायें। इससे 2-3 दिन में ही लाभ होता है।

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