Shami Vriksh

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Shami Vriksh

Shami Vriksh / शमी वृक्ष

शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी ।

अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी ॥

करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया ।

तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता ॥

अर्थात हे : शमी वृक्ष

आप पापों का क्षय करने वाले और दुश्मनों को पराजित करने वाले हैं। आप अर्जुन का धनुष धारण करने वाले हैं और श्री राम को प्रिय हैं। जिस तरह श्री राम ने आपकी पूजा की, हम भी करेंगे। हमारी विजय के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं से दूर कर के उसे सुखमय बना दीजिये।

(Brahmavriksha Palasha / ब्रम्हवृक्ष पलाश)

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