Chhath Puja Vidhi Aur Surya Arghya Mantra

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Chhath Puja Vidhi Aur Surya Arghya Mantra

Chhath Puja Vidhi Aur Surya Arghya Mantra

छठ पर्व का पूजा विधि और सूर्यदेव अर्घ्य मंत्र

इस दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में सूर्य को साक्षात भगवान माना गया है, क्योंकि वे रोज हमें दर्शन देते हैं और उन्हीं के प्रकाश से हमें जीवनदायिनी शक्ति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, रोज सूर्य की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

पूजा विधि

छठ की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर शौच आदि कार्यों से निवृत्त होकर नदी के तट पर जाकर आचमन करें तथा सूर्योदय के समय शरीर पर मिट्टी लगाकर स्नान करें।

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इसके बाद पुन: आचमन कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और सप्ताक्षर मंत्र- ॐ खखोल्काय स्वाहा से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

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इसके बाद भगवान सूर्य को लाल फूल, लाल वस्त्र व रक्त चंदन अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं तथा पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में हाथ जोड़कर सूर्यदेव से प्रार्थना करें।

इसके बाद नीचे लिखे शिव प्रोक्त सूर्याष्टक का पाठ करें-

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर मनोस्तु ते।।

सप्ताश्चरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्ममज्म।

श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।

बृंहितं तेज:पुजं च वायु माकाशमेव च।

प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।

बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम्।*

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज: प्रदीपनम्।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।

तं सूर्य जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणामाम्यहम्।।

इस प्रकार सूर्य की उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

 

क्या है  ” खखोल्क ” मंत्र ? 

(1)खखोल्क” शब्द की व्याख्या भगवान सूर्य नें सूर्य मंण्डल के संबोधन स्वरूप की है तथा ऋषियों एवं मनीषियों ने मार्तण्ड (सूर्य) को “खखोल्क” कहा है। कहा है अतैव “खखोल्क” शब्द सूर्य एवं सूर्य मंण्डल का बोध करवाता है।

(2) मोक्ष के पिपासुको को “ॐ नमः खखोल्काय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिय क्योंकि जिसके हृदय में मंत्र “ॐ नमः खखोल्काय” स्थित है वह व्यक्ति ही सर्वज्ञ, श्रुति संपन्न एवं अनुष्ठित है।किसी भी गुरु को यह महामंत्र अन्याय आचरण करने वाले व्यक्ति को नहि देना चाहिय। यह ज्ञान भगवान सूर्य ने अरुण देव को दिया था।

(3) भगवान श्रीकृष्ण ने भी सूर्य भगवान की आराधना कर साम्ब को दो प्रकार के “खखोल्क” मंत्रों का ज्ञान प्रदान किया था। “ॐ खखोल्काय नमः” इस सप्ताक्षरी खखोल्क मंत्र जप से किसी भी पक्ष की सप्तमी को अथवा नित्य सूर्योपासना परम पद को देती है।

(4) ॐ खखोल्काय स्वाहा” – इस मंत्रजप से नित्य सूर्योपासना करने वाले व्यक्ति के संपूर्ण विघ्न एवं पाप नष्ट हो जातें हैं एवं मनोरथ सिद्धि तथा पुण्यफल प्राप्ति भी हिती है।इस मंत्रजप के अंगन्यासादि इस प्रकार है: “ॐ ख: स्वाहा हृदयाय नमः, ॐ खं स्वाहा शिरसे स्वाहा, ॐ उल्काय स्वाहा शिखायै वषट्, ॐ याय स्वाहा कवचाय हुम्, ॐ स्वाँ स्वाहा नेत्रत्रयाय वौषट्, ॐ स्वाहा अस्त्राय फट्।”

(5) भगवान श्रीकृष्ण ने “ॐ खखोल्काय स्वाहा” – सूर्य देव के इस सप्ताक्षरी मंत्र के सविधि जप एवं पूजन को एक वर्ष पर्यंत करने के अनेकानेक लाभ कहे हैं यथा – रोगी रोगमुक्त हो जाता है, धनहीन धनयुक्त हो जाता है, राज्यभ्रष्ट पुनः राज्यप्राप्ति करता है, विद्यार्थी सद्विद्या प्राप्त करता है, कन्या को उत्तम वर प्राप्ति होति है एवं दुर्भगा उत्तम सौभाग्य की प्राप्ति करती है।

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